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लोक गीत (चैता)-भरत बिलाप

Posted On: 28 Mar, 2017 में

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बीति गइले चौदहो बरिस हे रामा, भैया नाही अइले ||
हियरा हिलोरे हमरे प्रेम क तूफानवां
काहे ना लवटि अइले हमारा बिरांवां
उठे ला करेजवा में टीस हे रामा ………………………||
का जानी कवनों कुटिल बिसरइलैं
या त सरगवा में जाई तरइलैं
नाहीं अइलैं कबहुँ कपीश हे रामा……………………..||
अइसन ते नाही किरण में भइले
या ते कवनों छलिया छल कइलें
या भेजलें कवनो खब्बीस हे रामा ……………………||
रही रही कसक उठे हमरे हियरवा
कइसे भुलइलै hamara पियरवा
निरखईलै रवि रजनीश हे रामा ……………………..||
लवटि आवा जल्दी सहोदर हे भाई
तोहरे बिना राज -काज क चलाई
“मधुकर “चाहै देखल महीष हे रामा ………………..||

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1 प्रतिक्रिया

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Shobha के द्वारा
March 29, 2017

श्री मधुकर जी अति सुंदर लोकगीत


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