Ghazel Ke Bahane, Desh Ke Tarane

Just another Jagranjunction Blogs weblog

24 Posts

5 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 23144 postid : 1313804

फगुआ लोक गीत

Posted On 11 Feb, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

लोगवा गइलैं बऊराई, फागुन में ||
पीली पीलिए सरसो से खेत पियराइल ,
गेहुआँ क बलिया भी झूमि लहरायल |
तिसिया गइले गदराई, फागुन में | लोगवा…….. ||
फुलवान प झुमिके भँवरा मरणाए,
टेसू गुलाब बहुत मन भाए |
अमवॉ सजल आमरायफागुन में | लोगवा …………||
चिरई जनाराव के मनवा उमगलै ,
बोल लता झुरमुट गरवा मिलउले |
किलकय कोयल रस पाई, फागुन में ||लोगवा ……..||
मदमाती घुमै ली बन ठन गुजरिया ,
बुड़वा जवनका के मोरै नजरिया |
केहु भला केतना लजाई, फागुन में ||लोगवा……… ||
फ़ाग कबीरा गामा झूमि के गावै ,
विकर्मा विनोद शरन खुशिया मनावै |
“मधुकर” दिया हुलसाही, फागुन में || लोगवा …….||

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran