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अगर हो तो ऐसा हो -:गजल ताल धमाल:-

Posted On: 23 Aug, 2016 में

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केश धर कंश को मारे,क्लेशहर हो जो ऐसा हो |
खेल में सुभटों को मारे,बीरवर हो हो तो ऐसा हो ||
गेंद खेलन बहाने से,नाग को नाथ कर लाए |
घायल कर मर्द दी काली मर्दहर हो तो ऐसा हो ||
चीख कर गज ने ही जब ही पुकारा था प्रभुवर को |
छोड़ सेवा को धाए है,प्रीतिहर हो तो ऐसा हो ||
जन्मे थे प्रभू आपहि, अवनि का भार कम करने |
झंझटो से न डिग खाए, धैर्यधर हो तो ऐसा हो ||
टूटी थी मातु -पितु बेड़ी, हुए पैदा थे जब आपहि |
ठाढ़ सब रह गए प्रहरी, सूत्रधर हो तो ऐसा हो ||
डराए इंद्र से जबही, ब्रज नगरी के पुरवासी |
ढाँढ़स बस ली उठा गिरि को ,गिरधर हो तो ऐसा हो ||
तरसते रह गए मुनिजन, रूप का दर्श कुछ पाए |
थे दिए दर्श गोपिन को ,दृष्टिधर हो तो ऐसा हो ||
धर्म की रक्षा कर नटवर ,मिटाये है सब असुरों को |
नहीं है शब्द “राय साहब” नमन कर हो तो ऐसा हो ||
**सभी बंधुओ को जन्मास्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ**

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